आपके खान-पान पर माता पिेता के संस्कारों का प्रभाव है या नहीं

वर्तमान समय में आप जैसे भी है, उसके लिए निश्चित तौर आपके माता पिता ने कुछ जिम्मेदारी आप पर डाली होगी। आप जिस तरह खाते हैं, उसका दोष तो अपने माता पिता या पूर्वजो पर डाल सकते हैं। लेकिन वर्तमान समय में जो खा रहे हैं, उसके लिए अपने पूर्वजों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। आप यह नहीं कह सकते की, अपके माता पिता जे सब खाते थे इसलिए आप भी खा रहे है’. ऐसा नहीं है। केवल आप खाने के तरीके को लेकर अपने माता पिता या पूर्वजो को दोष दे सकते हैं, लेकिन क्या खाया जाए, इसका विकल्प हमेशा आपके पास है। सबसे पहली चीज जो आपकी मां ने आपको भोजन के रूप में दी होगी, वह अपना दूध होगा। इसलिए आप यह नही कह सकते कि “मेरी मां ने मुझे यही पीना सिखाया है तो मैं यही पियूंगा” आप जिस तरह खाते पीते है, उसका दोष आप किसी और पर डाल सकते हैं। हालांकि उस तरीके को भी हम चाहें तो बदल सकते हैं, फिर भी आप चाहें तो दूसरों को दोष दे सकते हैं, कि आपको कोई दूसरा तरीका सिखाया ही नहीं गया।

लेकिन आप क्या खाएं,या आपको क्या खाना पसंद है, इसका विकल्प हमेशा आपके पास रहता है। कोई जरूरी नहीं कि आप भी वहीं सब खाएं, जो दूसरे चीनी लोग खाते हैं। आप कुछ अलग भी खा सकते हैं। लेकिन खाने के तरीके का क्या किया जाए, इसे तो हमने बचपन में सीखा था, जो एक खास तरीके से चला आ रहा है। जिंदगी की कुछ बुनियादी बनावट या तंतु हमें अपने माता पिता से जिंस आदि मिलते हैं। लेकिन हमारा जीवन तत्व यानी हम जीवन को कैसे व्यतीत कर रहे हैं यह खुद हम तय करते हैं। हमारे भीतर क्या आया इसके लिए हम भले ही जिम्मेदार न हों, लेकिन हमारे भीतर से क्या बाहर जा रहा है यह विकल्प और जिम्मेदारी निस्संदेह हमारी होती है। हमारे भीतर जो भी आया, वो हमारा चयन नहीं था। ऐसा होता है, इसमें क्या कर सकते हैं? लेकिन हमें जो भी मिला, उससे अपने भीतर हम क्या तैयार करते हैं और क्या बाहर निकालते हैं, वो सौ फीसदी हमारा चयन होता है।

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