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हाई कोर्ट ने बिना लिखित पुलिस कांस्टेबलों की परीक्षा को प्रतिबंधित किया

High Court

बिना लिखित परीक्षा कराए हाईकोर्ट ने पुलिस महकमे में 34716 आरक्षियों की भर्ती का परिणाम घोषित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि प्रदेश सरकार से पूछा गया है कि पुरानी नियमावली को समाप्त किए बिना उसे किस तरह से नए नियम से भर्तियाँ की जायेगी। प्रदेश सरकार की दलील को नजरंदाज़ करते हुए हाई कोर्ट ने बताया कि भर्ती की विधि शुरू होने के बाद नियम को नहीं बदले जा सकता हैं। कोर्ट के अगले आदेश तक चयन प्रकिया पर कड़ी पाबंदी लगाई है।

हाई कोर्ट के इस फैसले पर पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी रणविजय सिंह  और विवेकानंद यादव के साथ दर्जनों लोगों ने भर्ती प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। आवेदन पत्र जारी करने के बाद न्यायधीश तरुण अग्रवाल और न्यायधीश वीके मिश्र न्यायधीशो के वर्ग सुनवाई कर रहे है। आवेदन पत्र के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक प्रदेश में होने वाली बिना लिखित परीक्षा के कांस्टेबलों की सीधी भर्ती की घोषणा होंने के बाद 34716 पदों के लिए विज्ञापन 29 दिसंबर 2015 को निकाला जा चुका था। इस पुलिस कांस्टेबलो की संख्या में 28916 पुरुष और 5800 महिला आरक्षियों की भर्ती होना निश्चित किया है।

भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने से पहले 2 दिसंबर 2015 को हिंदी में जारी नियमावली  की सूची पर आधारित कांस्टेबलों की भर्ती फ़िलहाल नए नियमो के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। सरकार ने इसके पश्चात् 17 फरवरी 2016 को नियमावली का खंडन प्रकाशित किया और इसका संशोधन किया, नई नियमावली 2008 की नियमावली के ‘उल्लंघन करते हुए’ जारी की जा रही  है।

लिखित परीक्षा सिपाही के लिए जरूरी है

दरअसल आवेदन पत्र में इस विषय पर आपत्ति जताई है कि पहले प्रकाशित किये गए सूचि बजट में 2008 की नियमावली का ‘उल्लंघन करते हुए’ शब्द नहीं शामिल था, इसका सीधा सा अर्थ यह है कि भर्ती का विज्ञापन 2008 की नियमावली को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया था,  भर्ती के विज्ञापन जारी होने का सीधा अर्थ है  की चयन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और इसके नियमों  में किसी भी प्रकार की परिवर्तन होने की संभावना नही है। हाई कोर्ट में पीठ ने अपने परिणाम जारी करने पर पाबंदी लगाते हुए प्रदेश सरकार से प्रश्न किया कि पुरानी नियमावली के लागू रहते हुए किस प्रकार से उसने नए नियमावली से भर्ती का चयन शुरू कर दी।

अब इस विषय पर 22 जुलाई को आखरी सुनवाई होनी है। यकीनन इस याचिका में दलील दी गई है कि प्रदेश में पुलिस विभाग में सिपाही का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आम जनता के लिए सिपहियो को उनके बीच में रहकर काम करना पड़ता है। उसके साथ-साथ शारीरिक दक्षता के साथ ही मानसिक योग्यता का परीक्षण भी अत्यंत आवश्यक है।  इसलिए पुलिस विभाग अपनी आवश्यकता को ध्यान में रखकर योग्यता का परीक्षण करता है। इसी के साथ प्रदेश सरकार ने मनमानी करते हुए पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा समाप्त कर दिया गया है। परन्तु मानसिक योग्यता का परीक्षण तार्किक क्षमता को परखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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