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सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के सिगरेट पीने पर जताया अफ़सोस

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सुप्रीम कोर्ट ने देश के युवाओं को सिगरेट पीने पर अफसोस जताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिगरेट के पैकट पर वैधानिक रूप से चेतावनी होने के बावजूद युवा इसका सेवन कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस आवेदन पर दी जिसमें गुहार की गई थी कि सिगरेट व बीड़ी के पैकेट के 85 फीसदी हिस्से पर वैधानिक चेतावनी दी जाए। न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने बताया कि ऐसा लगता है कि देश के युवा पीढ़ी सिगरेट का आनंद ले रहे हैं। उन्हें अपने शारीरिक स्वास्थ्य की कोई फिक्र नहीं है।

अधिकांश लोग तो एक के बाद एक लगातार सिगरेट पी जाते हैं। हमने खुद ही नौजवानों को सिगरेट पीते देखा है। पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील से कहा कि युवा मासूम नहीं हैं। उन्हें भलीभांति पता होता है सिगरेट पीना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है। इस आवेदन में कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें बीड़ी के पैकेट पर ‘वैधानिक चेतावनी’ संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट में कर्नाटक बीड़ी इंडस्ट्री एसोसिएशन ने आवेदन दाखिल कर कहा था कि बीड़ी के पैकेट छोटे होते हैं लिहाजा पैकेट पर वैधानिक चेतावनी का चित्र लगाने की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके सिगरेट और बीड़ी के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी का आकार 40 फीसदी से बढ़ाकर 85 फीसदी करने का फैसला लिया था। हालांकि इस संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश कर्नाटक हाईकोर्ट से अलग है। राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अधिसूचना पर अमल करने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को यह खबर दी कि इस मामले पर कर्नाटक और राजस्थान हाईकोर्ट का भिन्न भिन्न निर्णय है। फ़िलहाल अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है।

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