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व्यंग्य – PK के खिलाफ मुकदमा कर देना चाहिए

Pk-wallpaper

ये अच्छी बात है की राजकुमार हिरानी ने PK बनाई है, ये तो और भी अच्छी बात है की आमिर खान ने इस फिल्म में एक्टिंग की। लेकिन ये अच्छी बात नहीं है
की इन दोनों ने हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। उतरना पड़ेगा
सड़कों पर, धर्मगुरुओं से लेकर पूरी मनुष्य बिरादरी को भला बुरा बोला, हिंदू धर्म छोड़िए, पान वालों से लेकर पूरी दिल्ली पुलिस तक को बदनाम कर डाला। इतनी हिम्मत हो गयी, विरोध करना तो बनता है।फिल्म रिव्यू – जैसे भी हो जरुर देखे PK
PK के खिलाफ अब सवाल उठता है कि वो कौन कौन से लोग है जो मोर्चा खोलें, यह लिस्ट लंबी है …. लेकिन  चुनिंदा लोगों का नाराज होना तो जाएज है।
1. राजस्थान के चरवाहों को
बताइए कोई धरती पर पहली बार आया तो हम उसका स्वागत करेंगे. ये हमारी आदत है, हमें बाप-दादाओं ने यही सिखाया है. राजस्थान वाले तो बोलते भी हैं.. पधारो म्हारे देश. पर ये क्या, रेलवे ट्रैक पर एक चरवाहे को दिखाया, वो भी चोर. ये क्या मजाक है? चरवाहा दर दर की ठोकरें खा लेगा पर एक नंगे शख्स के आभूषण की चोरी, न बाबा न. कर ही नहीं सकता. समाज अपमानित हुआ है.
2. पान खाने व बेचने वालों को
यू ही कोई भी मुंह उठाकर पान खाना नहीं सीख लेता है पान खाने वालों की तो बात ही कुछ और होती है । पान खाने के लिए प्रॉपर ट्रेनिंग लेनी पड़ती है, कितना देर चबाना चाहिए और कब पिचकारी मारनी चाहिए, और बहुत ही अहम है बनारस का रोल वहां तो जाना पड़ता ही है, नहीं गए तो अपने बनारसी पान भंडार के दर्शन होना तो जरुरी है और फिल्मों की बात तो फिल्मो में तो पान नेताओं के मुख की शोभा बढ़ाता रहा है तो फिर वेश्याओं को पान खाते हुए क्यों दिखलाया गया? वो भी बनारस की, राजस्थान की होती तो कुछ समझ में भी आता।
3. भोजपुरी भाषियों को
क्या दिन आ गए हैं भोजपुरी के? न व्याकरण सीखा, न कोई क्लास ली. बस बोलने लगे. सीखा भी किससे? एक वेश्या से. वो भी सिर्फ हाथों को छूकर. मतलब दिखाना क्या चाहते हैं ये लोग? एक तो यह तरीका साइंटफिक नहीं है. दूसरा राजस्थान की वेश्या भोजपुरी बोल रही है. वो राजस्थानी क्यों नहीं बोल रही? कहीं उसका ताल्लुक बिहार या यूपी से तो नहीं. ये तो हद हो गई, माना कि बिहार और यूपी में पलायन ज्यादा है, पर यह दिखाना अक्षम्य है.
4. न्यूज चैनल वालो को
न्यूज चैनल वालो की भी कुछ मजबूरियां रही होंगी जो कुछ न्यूज चैनल कुत्ता-बिल्ली दिखाते है अगर किसी स्टेशन पर एक बंदर ने डॉक्टर बनकर दूसरे बन्दर को बचाया तो स्पेशल रिपोर्ट तो बनेगी ही ना । इसका मतलब ये तो नहीं कि यही हमारी पहचान है, किसी खूबसूरत एंकर के सामने स्टूडियो में सबको चीखते-चिल्लाते दिखाते तो बात समझ में भी आती है, मगर उसकी जगह  सड़क से उठाकर किसी पिल्ले को खूबसूरत से हाथों में रख दिया, माना के वो पिल्ला क्यूट था, पर लेब्राडोर या जर्मन शेफर्ड तो दिखाते, कम से कम पामेरनियन तो होना ही था । दूसरों की आवाज बहुत बन लिए, अब खुद के लिए लड़ना होगा मीडिया वालों को।
5. मंदिर के बाहर पूजा का सामान बेचने वालों को
ज्यादातर जनता इस दुनिया में भगवान के भरोसे ही जी रहे है, कुछ लोग उम्मीदों की आस लगाये हुए, तो कुछ लोग मंदिरों में वास लिए हुए । हर कोई प्राड़ी प्रभु की कृपा पर ही टिका हुआ है, फीर चाहे वो पंडित हो या फूल, प्रसाद व मूर्तियाँ बेचने वाला हो । चार पैसे कमाने के लिए अब एक मूर्ति वाला अपनी मूर्तियां नहीं बेचेगा तो और क्या करेगा, लेकिन PK में उस इन्सान  को बहुत ही चालाक दुकानदार दिखा दिया गया है । वो मुर्तिवाला दो पैसे ज्यादा नहीं कमाएगा तो घर कैसे चलाएगा. PK के बच्चे नहीं होंगे, लेकिन उस मूर्तिवाले के बच्चे तो हैं । मंदिर के सामने कम से कम भीख तो नहीं मांग रहा है, मेहनत की कमाई खा रहा है इसकी कदर तो करनी चाहिए ।
6. डेरी वाले या दूध बेचने वालों को
दूध… रोज एक ग्लास फुल पी सकते हैं? बहुत लोगो को तो दूध मिल ही नहीं पाता है, मगर भगवान के नाम पर कंजूसी का सवाल तो हो ही नहीं सकता है, क्योंकि मसला भगवान को खुश करने का है, अपनी इच्छाओं को पूरा करने का है । लेकिन अब PK इसे दिखावा कहता है । भगवान तो नाराज हों जायेगे ना अगर लोग दूध चढ़ाना बंद कर देंगे, साथ ही दूधवालों की कमाई कैसे होगी? बेचारे दूधवाले कमाएंगे नहीं तो कैसे जीएंगे?

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