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राहुल गांधी, रोहित के परिवार और छात्रों से मिलेने गए

Rahul

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंचे. मंगलवार को लगातार छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी दूसरे दिन भी बंद रहा. उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने रोहित की मां से भी मुलाक़ात की. राहुल ने कहा कि वो एक राजनेता की हैसियत से नहीं आए हैं, बल्कि एक युवा की तरह दूसरे युवाओं से मिलने आए हैं. उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला को ख़ुदकुशी करने पर मजबूर करने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए.

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पीएच.डी कर रहे दलित छात्र रोहित वेमुला ने रविवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. रोहित और चार अन्य दलित छात्रों को कुछ दिनों पहले यूनिवर्सिटी से सस्पेंड किया गया था और उन सभी को हॉस्टल से भी निकाल दिया गया था. हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष ज़ुहैल केपी ने बताया, ‘”हम केंद्रीय राज्य मंत्री बंडारु दत्तात्रेय, कुलपति अप्पा राव पिंडले और अन्य लोगों की अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण क़ानून के तहत तुरंत गिरफ़्तारी की मांग कर रहे हैं. हमारी पांच मांगें हैं, हम चाहते हैं कि उन्हें तत्काल लागू किया जाए.”

छात्र संघ की इन पांच मांगों में कुलपति को तत्काल हटाने, रोहित के परिवार को 50 लाख रुपए की मुआवज़ा देने, रोहित के पिछले साल जुलाई से बक़ाए रक़म को अविलंब भुगतान किया जाए, एएसए के नेताओं पर दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए और विश्वविद्यालय से उनके निलंबन को ख़त्म किया जाए. केंद्र सरकार में श्रम-रोज़गार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के हैदराबाद स्थित घर के बाहर मंगलवार को छात्रों ने प्रदर्शन कर नारेबाज़ी किया. सिकंदराबाद के भाजपा सांसद बंडारू दत्तात्रेय ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखा था. इसके बाद पांच छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था.

भाजपा सांसद बंडारू दत्तात्रेय ने बीते साल अगस्त में लिखे अपने पत्र में अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन (एएसए) को जातिवादी, चरमपंथी और राष्ट्रविरोधी संगठन बनाया था. इन पांचों छात्रों को विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थल पर जाने से रोक लगा दिया गया था. दो जनवरी से रोहित और उनके चार साथी छात्र निलंबन के विरोध में विश्वविद्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे और अपने निलंबन को वापस लेने की मांग कर रहे थे. अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन का आरोप है कि दत्तात्रेय के दबाव के कारण ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोहित और उनके साथियों को दंडित करने का फ़ैसला लिया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक सदस्य ने इन छात्रों पर मारपीट करने का आरोप भी लगाया था.

सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पहली जांच में इन आरोपों को ग़लत पाया गया था. एक स्थानीय नेता ने भी अपनी शिकायत दर्ज कराई और नए कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने बिना कोई नई वजह बताए, बिना किसी नई जांच के, पहली जांच के फ़ैसले को उलट दिया और रोहित वेमुला और उनके साथी छात्रों को दंडित करने का फैसला लिया.

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