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‘मैंने आतंकियों की गोलीबारी देखी, उनके पास एके-47 थी’

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शहर पेशावर से 40 किलोमीटर दूर उत्तर में है चारसद्दा स्थित बाचा खान विश्वविद्यालय है। यहां सब कुछ सामान्य दिनों की तरह ही चल रहा था। यहीं सुबह साढ़े दस बजे खान अब्दुल गफ्फार खां की याद में मुशायरे की तैयारी थी। पांच सुरक्षा चेक थे लेकिन सुरक्षा घेरा सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए था। छात्रों के लिए कोई सुरक्षा घेरा नहीं थी। अचानक 9 बजे के आसपास परिसर में अंधाधुंध गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं। खबर फैल गई कि परिसर में कुछ गड़बड़ है। तभी अंदर 10 धमाकों की आवाज सुनी गई और आतंकी हमले की खबर फैल गई।

बाचा खान विश्वविद्यालय में करीब तीन हजार छात्र पढ़ते थे। युवा हमलावर हमारे जैसे थे। उनके पास एके-47 थी। उन्होंने सैनिकों की तरह जैकेट पहनी हुई थी। होस्टल में अभी कक्षाएं नहीं लग रही हैं। होस्टल में 200 से 300 छात्र थे। सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच जमकर गोलीबारी हुई। कुछ देर बाद सेना के लोगों ने उनके कमरों को खटखटा कर कहा, हम सुरक्षित हैं। जियोलॉजी के छात्र जहूर अहमद- मैंने आतंकियों की गोलीबारी देखी। हमारे कैमिस्टी के प्रोफेसर ने हमें आगे जाने से रोका। उन्होंने अंदर जाने को कहा। आतंकियों के हाथ में पिस्टल थी।’ कैमिस्टरी के छात्र – विश्वविद्यालय के द्वार पर ही आतंकी घात लगा कर बैठ गए।

इमित्याज, छात्र- मैंने तीन आतंकियों को देखा। एक छत पर, दूसरा कोने में और तीसरा युनिवर्सिटी की बाउंडरी दीवार पर देखा। शबीर खान, अंग्रेजी के शिक्षक- आतंकी इमारत की दूसरी तीसरी मंजिल तक भी पहुंच गए थे, गोलीबारी के समय अधिकतर छात्र और स्टाफ कक्षा में थे, आंतकियों के सिर पर खून सवार था। चश्मदीद छात्र मेरे सामने ही मेरा दोस्त मारा गया, उसके साथ मेरे सामने ही दो जवान भी मारे गए। खैबर पख्तुनख्वा के प्रांतीय विधानसभा के सदस्य अरशद अली- हमलावारों ने रजिस्टार दफ्तर पर ही हमला कर दिया था। हमारे प्रोफेसर हामिद मारे गए। डर कर दो दोस्त ईमारत से कूद गए। वे भी नहीं बचे, विश्वविद्यालय में खान की पुण्यतिथि से संबंधित मुशायरे का कार्यक्रम सुबह साढ़े दस बजे शुरू होना था। मगर उससे पहले ही गोलीबारी शुरू हो गई। पांच सुरक्षा चेक थे। मगर सुरक्षा घेरा सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए ही था। छात्रों के लिए कोई सुरक्षा घेरा नहीं थी। विश्वविद्यालय में सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं थे। विश्वविद्यालय की दीवार पर चढ़कर आतंकी अंदर घुसे थे।” यह प्रांत हमेशा से आतंकवाद के निशाने पर रहा है। पाकिस्तान में बढ़ रहे आतंक का हम सबसे ज्यादा भुक्तभोगी है। यह अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद है। पाकिसतानी सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसी वजह से वे ऐसे हमले कर रहे है।

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