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मायावती की मुश्किलें बढ़ा सकता है ‘भाईसाहब’ के राज

Mayawati

नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनिय यादव सिंह की गिरफ्तारी के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के सामने बड़ी मुसीबत आने के आसार दिख रहे हैं। हालांकि यादव सिंह के घोटाले से सबंधित छींटे सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी है। छह दिन की सीबीआई रिमांड पर गए पूर्व चीफ इंजीनिय यादव सिंह ने छापेमारी के बीच मिली एक डायरी में दर्ज कोड नेम के बारे में औपचारिक स्टेटमेंट दर्ज कराया है। सीबीआई के मुताबिक मिली डायरी के कोड नेम भाईसाहब मायावती के करीबी रिश्तेदार के लिए लिखा गया है। जबकि कोड नेम पंडितजी नोएडा एनसीआर के बसपा के सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति का है। छापेमारी में मिली डायरी के अनुसार काफी समय से इन दोनों के नाम पर करोड़ो के लेनदेन हुए है।

यह डायरी आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान यादव सिंह के घर हासिल की गयी थी। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि, काफी समय तक डायरी वित्त मंत्रालय के कब्जे में थी। सीबीआई ने करीब तीन महीने पहले मायावती से इन नामों के बारे में पूछताछ कर चुकी है जब सीबीआई की टीम उनके दिल्ली स्थित निवास पर एनआरएचएम घोटाले के मामले में जाँच पड़ताल करने गई थी। दूसरी तरफ सीबीआई यादव सिंह के साथी राजीव मिनोचा की कंपनी एमएन बिल्डवेल की 9995 शेयर के मामले को भी रिकार्ड पर ले लिया है। हालांकि यह शेयर सपा के सांसद के नाम पर है। राजीव मिनोचा की कंपनी में यादव सिंह की पत्नी बराबर की साझेदार हैं। वह सांसद सपा के कद्दावर नेता के करीबी रिश्तेदार हैं। जानकारों के अनुसार, नोएडा समेत पूरे एनसीआर में भाईसाहब और पंडितजी का रियल स्टेट का बड़ा कारोबार है।

पूर्व चीफ इंजीनिय यादव सिंह के देखरेख में सीबीआई टीम को पूरा शक था की, ग्रेटर नोएडा, नोएडा यमुना एक्सप्रेस से सम्बंधित घोटाल व राजनीतिक शीर्ष के मध्य पंडितजी और भाईसाहब अहम कड़ी थे। कड़ियों के आधार पर यादव सिंह के घोटाले के पुख्ता सिस्टम में जिन लोगो ने रोकने का प्रयास किया है उसके स्थानान्तरण का आदेश सीधे लखनऊ के मुख्यमंत्री दफ्तर से जारी होता था। साल 2011 में इसका शिकार बने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ बलविंदर कुमार जिनका कार्यकाल लगभग 100 दिन चल पाया था। नोएडा के किसानों को अधिग्रहित की गई जमीनों के बदले बलविंदर कुमार ने अबादी वाली जमीन देने का आदेश जारी कर दिया था।

नोएडा अथॉरिटी के सीईओ बलविंदर कुमार ने नोएडा की संपत्ति की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आनलाईन सुविधा की व्यवस्था आरम्भ की थी। संपत्ति की पारदर्शिता की व्यवस्था यादव सिंह के काम में रुकावट पैदा कर रहा था। बलविंदर के बाद नोएडा के सीईओ कैप्टन एस के दिवेदी का भी अंजाम यही हुआ। दिवेदी का कार्यकाल चार महीने का था और मार्च 2012 में जब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली थी तब इनका स्थानान्तरण कर दिया था। दिवेदी ने प्लानिंग विभाग समेत दो बड़े प्रोजेक्ट से यादव सिंह दिया था। लखनऊ से दिवेदी को भी फोन आए और उन्हें नोएडा में रहे सपा के बड़े नेता से मिलने को कहा गया, सीबीआई के अनुसार।

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