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भाजपा की शरण में आने से पहले बसपा में हलचल मचाएगे: मौर्य

Swami-Prasad-Maurya

मीडिया की खबरों के मुताबिक बसपा के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य जल्द ही भाजपा की शरण में जाने वाले है, लेकिन इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। भाजपा की पार्टी में शामिल होने से पहले स्वामी प्रसाद बसपा के विरुध्य अपने सारे हथकंडे आजमा लेना चाहते हैं। दरअसल इस रणनीति में भाजपा नेतृत्व की पूरी सहमती है। सपा के दरवाजे बंद हो जाने के बाद अब स्वामी के लिए भाजपा में शामिल होना तो निश्चिंत है।

भाजपा नेतृत्व इस बात से परिचित है कि इस दौरान सियासी परिस्थितियों में फ़िलहाल स्वामी के पास भाजपा की शरण में आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। हालांकि अभी उनके पास खुद की पार्टी खड़ी करने या नया फ्रंट बनाने का विकल्प तो है, लेकिन उत्तर प्रदेश का सियासी इतिहास को देखा जाये तो ऐसा प्रयास करने वाले नेता ने बाद काफी कठिनाइयों का सामना करना है। हाल ही में सपा के खिलाफ सियासी हमला बोलने के बाद दिल्ली आए स्वामी ने भाजपा नेतृत्व के उत्तर प्रदेश प्रभारी ओम माथुर से गुप्त मुलाकात भी की थी।

हालांकि भाजपा के करीबी सूत्र के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल करने पर सैद्घांतिक एकमद बनायी जा चुकी है। मौर्य के समर्थक अन्य नेताओं को भावी योजना बसपा में साधने की है। फ़िलहाल मौर्य इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं। दरअसल लखनऊ में एक जुलाई को मौर्य शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं। लखनऊ में आयोजित इस शक्ति प्रदर्शन से ही पता चल जाएगा कि मौर्य के साथ बसपा के और कितने नेता हैं। खबरों के अनुसार पार्टी ने मौर्य को उचित सम्मान देने का प्रस्ताव सामने रखा है और उनका बदलाव भी सकारात्मक है। क्योंकि स्वामी का सपा की शरण में जाने का मामला खत्म हो चुका है। मौर्य का भाजपा पार्टी में शामिल होने को लेकर अब कोई संदेह नहीं दिख रहा है।

हालांकि करीबी सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार पिछले तीन महीने से मौर्य पार्टी के करीब थे, लेकिन पहले उनकी ये रणनीति साफ़ नहीं थी। मौर्या ने अचानक से सपा में शामिल होने की बात पर हामी भी भर दी थी। यकीनन उनके मन में नई पार्टी खड़ी करने की इच्छा भी थी, फिर कुछ समय बाद सियासी बातचीत होने के पश्चात् मौर्या ने नई पार्टी खड़ी करने के विचार को बदल दिया। यकीनन भाजपा को पिछड़ा वर्ग का कद्दावर नेता होने के कारण मौर्य नेतृत्व विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण बिठाने में काफी मदद मिलेगी। वैसे भी भाजपा पार्टी की रणनीति गैरयादव पिछड़ा और गैरजाटव दलित को साथ आगे लाने की है। इसी रणनीति के अनुसार मौर्य गैरयादव पिछड़ा को पार्टी के पक्ष में सहायक साबित हो सकते हैं।

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