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फेसबुक, टि्वटर की शिकायतों पर 24 घंटे में करेगा रिस्पां।स ईपीएफओ..

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नई दिल्‍ली।  सोशल मीडिया साइटों फेसबुक और टि्वटर पर आने वाली शिकायतों पर कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) 24 घंटे के अंदर रिस्‍पांस करेगा। ईपीएफओ ने अपने सभी रीजनल कार्यालयों को एक अलग सोशल मीडिया टीम बनाने का आदेश दिया है ताकि निश्चित समय में रिस्‍पांस किया जा सका।

ईपीएफओ की ओर से अपने सभी रीजनल कार्यालयों को जारी किए गए सर्कुलर में कहा गया है कि सोशल मीडिया हमारी डेली लाइफ का एक महतवपूर्ण अंग बन चुका है। सरकार कि नज़र में सोशल मीडिया पारदर्शीका को बढ़ावा देता है जिससे आम जनता सरकार के बारे में बेहतर जान सके और उनके बारे में बेहतर राय बना सके।

लोगो कि शिकायतें और सुझाव

सर्कुलर में कहा गया है कि ईपीएफओ फेसबुक और ट्विटर नामक दो सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल कर रहा है। फेसबुक पेज पर मई 2016 तक 1600 लोग ने लाइक किया है और ट्विटर पर 600 लोग फॉलो कर रहे। आने वाले समय में संख्‍या बढ़ने की उम्‍मीद है। सर्कुलर में कहा गया है कि इन सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर लोग शिकायतों के साथ सुझाव भी देते हैं। इसलिए इन शिकायतों पर रिस्‍पांस सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इन शिकायतों पर 24 घंटे के अंदर रिस्‍पांस किया जाए इस बात को भी सुनिश्चित करना चाहिए।

24 घंटे रहेगी सोशल मीडिया टीम एक्टिव

सर्कुलर में कहा गया है कि प्रभावी रिस्‍पांस सुनिश्चित करने के लिए एक अधिकारी और उसकी टीम को सोशल मीडिया के लिए नामित किया जाना चाहिए। इस टीम को ईपीएफओ और लेबर मिनिस्‍ट्री के फेसबुक पेज को लगातार विजिट करना चाहिए जिससे पता चल सके कि पेज पर उसके ऑफिस का कोई रेफरेंस तो नहीं है।

सोशल मीडिया की मदद से अपनी इमेज में सुधार

अपने मेंबर्स के बे‍नेफिट के लिए पिछले कुछ सालो से ईपीएफओ ने ये योजना बनायी हैं। सोशल मीडिया के जरिए ईपीएफओ अपने कार्य को लोगों तक पहुचाने और ईपीएफओ की ईमेज को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए एक प्राइवेट एजेंसी हायर करने पर के बारे में भी सोच रहा है। यह एजेंसी ईपीएफओ के फेसबुक पेज और टि्वटर कि देखरेख का प्रबंधन करेगी। इस समय में 3.6 करोड़ एक्टिव मेंबर हैं ईपीएफओ के।

पीएफ डिपॉजिट नहीं जमा करा रहीं हजारों कंपनियां

इस समय 10,000 से अधिक कंपनियां अपने कर्मचारियों का पीएफ डिपॉजिट नहीं जमा कर रही हैं। इनमे बीमार कंपनी और बंद हो चुकी कंपनिया भी शामिल है। पीएफ जमा कराने को लेकर कंपनियों के मामले सालों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इसलिए इस मामले को लेकर कंपनियों और ईपीएफओ अधिकारियों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं।

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