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फिल्म ‘हरामखोर’ पर सेंसर बोर्ड ने चलाई कैची

Nawazuddin-Siddiqui

निर्देशक अभिषेक चौबे की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर हुए लंबे विवाद के बाद अब सेंसर बोर्ड की नजर अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी की अभिनीत फ़िल्म ‘हरामखोर’ पर आपत्ति दिखाई है. हाल ही में निर्देशक और फ़िल्म उड़ता पंजाब के निर्माता अनुराग कश्यप ने ट्वीटर पर लिखा है, ‘जिस विषय पर फ़िल्म हरामख़ोर को मामी फ़िल्म फ़ेस्टिवल में अवॉर्ड से नवाजा गया है उसी विषय पर बनी फिल्म पर अब बोर्ड को एतराज़ है. ट्रिब्यूनल के सामने अब इस फ़िल्म के निर्माताओं को भी जाना चाहिए और बोर्ड की रिवाईज़िंग कमिटी के पास जाना बातचीत करना बेमतलब होगा.’

मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉफ़्रेंस में अनुराग कश्यप ने कहा कि, मेरे मुताबिक पहलाज निहलानी को निकल देने से कुछ नहीं हासिल होगा क्योकि समस्या तो हमारे सिस्टम में हैं. इसकी क्या गारंटी है कि जब अगला व्यक्ति आएगा वो ऐसा नहीं करेगा? अब बोर्ड की कार्यशैली में परिवर्तन की आवश्यकता है. बात ये है कि फ़िल्म ‘हरामखोर’ में एक 14 साल की छोटी बच्ची और उसके ट्यूशन टीचर के बीच बढ़ते प्यार को दिखाया गया है और सेंसर बोर्ड का मानना है कि, शिक्षकों की गलत छवि को दिखाने वाली इस फिल्म को रिलीज नहीं करने दिया जायेगा, चाहे इस फिल्म को कोई भी अवॉर्ड मिला हो.” शिक्षक की ऐसी गलत छवि पर फिल्मे नहीं बननी चाहिए.

दरअसल इस फ़िल्म के निर्माताओं को मिले ऑब्जेक्शन लेटर के मुताबिक, फ़िल्म ‘हरामखोर’ की कहानी सही नहीं है और इसी वजह से फ़िल्म को रिलीज़ सर्टिफ़िकेट देने में आपत्ति जताई गयी है, लेकिन अगर निर्माता फिर भी बोर्ड की इस बात से सहमत नहीं हैं तो वह स्वयं रिवाइज़िंग कमिटी या स्वतंत्र ट्रिब्यूनल के पास अपनी आपिल करने जा सकते हैं.’

खबरों के अनुसार फ़िल्म की निर्माता गुनीत मोगा ने अपनी बात साफ करते हुए कहा कि उनके पास अब इस फ़िल्म के लिए कोर्ट में केस लड़ने के लिए पैसे नहीं बचे है और इसी कारण अब उन्हें ट्रिब्यूनल के पास ही जाना होगा. इसके साथ ही निर्माता निर्देशक हंसल मेहता का कहना है, ‘ये बात गलत नहीं है कि सभी निर्माता निर्देशक के पास इतने अधिक पैसे नहीं होते है कि वो फिल्मो के लिए कोर्ट कचहरी में जाये और अपनी फ़िल्म के लिए केस लड़ सके और इस समस्या के लिए जल्द ही कोई समाधान निकलना होगा’. हालाँकि सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म के विषय को आपत्तिजनक माना है और फ़िल्म में शिक्षकों की छवि को ग़लत तरीक़े से दिखाया गया है यही कारण है कि इस फ़िल्म को बोर्ड द्वारा पास नही किया जायेगा.

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