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इस एकादशी में व्रत रखने से मितलता है मोक्ष, देवता भी रखते हैं इस व्रत को

Ekadashi-Vrat

कार्त‌िक महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी का बड़ा ही महत्व है। कहा जाता हैं कि इस एकादशी को व्रत पूजा करने वाले के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जातेहैं और व्यक्त‌ि उत्तम लोक में जाने का अध‌िकार प्रात हो जाता है। इसल‌िएपरलोक में उत्तम गत‌ि की इच्छा रखने वाले व्यक्त‌ि इस द‌िन भगवान व‌िष्‍णु के इस व्रत को रखते हैं। एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता भी है क‌ि इस द‌िन देवतागण स्वंय भगवान व‌िष्‍णु के पास जाकर उनके दर्शन प्रात करके लाभ पाते हैं और व्रत पूजन भी करते हैं। आइये इस एकादशी के लाभ और महत्व को जानें, तथा इसकी क्या कथा है?

इस तरह भगवान व‌िष्‍णु की व्रत पूजन से वर्षभर खुशहाली बनी रहती है

कार्त‌‌िक शुक्ल की एकादशी को शास्‍त्रों में देव उठानी एकादशी और देवप्रबोधनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मन जाता है क‌ि इस द‌िन चार महीने शयन के बाद भगवान विष्णु जगते हैं। शास्त्रों का कहना है कि “देवप्रबोधनी एकादशी के दिन गन्ने का मंडप सजाकर विधिवत रूप से मंडप केअंदर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से वर्ष सुखमय व्यतीत होता है और मांगलिककार्यों में आने वाली बाधायें दूर होती है!

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